आटे की गोली

बाढ़ के कारण अपने पिता की धान की फसल बर्बाद हो जाने के बाद, छात्रा रागिनी को स्कूल की फीस न भर पाने की अनिश्चितता और डॉक्टर बनने के अपने सपने पर मंडराते खतरे का सामना करना पड़ रहा है।

यह कहानी है रागिनी की, जो अपने परिवार के साथ मध्यप्रदेश ज़िले भिंड के एक छोटे से गाँव गुरीखा में रहती है। रागिनी से मेरी मुलाकात गाँव के सरकारी स्कूल में लगे एक जागरूकता कैम्प के दौरान हुई।रागिनी और उसकी दोस्त निधि, उस वक़्त स्कूल के आँगन में खड़ी, घिलहरी के लिए बाजरा डाल रही थीं। मैं उनके पास गई और उनसे बड़े जिज्ञासापूर्ण स्वर में पूछा, “ये बाजरा किसके लिए है?” — बातों ही बातों में हम दोस्त बन गए।

रागिनी और उसकी दोस्त निधि, दोनों आठवीं कक्षा की छात्राएँ है। रागिनी मेरा हाथ पकड़कर मुझे अपनी कक्षा में ले गई। उसने बताया कि आज उनके गणित वाले सर नहीं आएंगे क्योंकि उनका तबादला हो गया है। कक्षा में बहुत कम बच्चे थे, माहौल कुछ ख़ाली-ख़ाली सा था।

रागिनी ने अपना बैग खोला, और उसमे से कुछ निकाला — फिर मेरा हाथ पकड़कर खिड़की के पास ले गई। खिड़की के बाहर एक तालाब जैसा कुछ दिख रहा था। रागिनी की डेस्क और उस तालाब के बीच केवल एक खिड़की का अंतर था। उसने मुझे तालाब में मछलियाँ दिखाई और अपने बैग से आटे की गोलियाँ निकालकर उन्हें डालने लगी। मैंने हैरानी से पूछा, “तुम ये क्या कर रही हो?” रागिनी हँसते हुए बोली, “ये मछलियों के लिए है।”

बातचीत के दौरान मुझे पता चला कि वह तालाब नहीं, बल्कि उनके पिता का धान का खेत था — जो अब पानी में डूब गया। कुछ दिनों पहले गाँव से 50km दूर बने डैम तिघरा का पानी भारि बारिश के चलते छोड़ा गया था, जिसके कारण पूरा खेत तालाब में तब्दील हो गया। रागिनी ने उदासी भरे स्वर में बताया, “ये मेरे पापा ने बटाई में लिया था — फसल कटने वाली थी कुछ दिनों में — उससे पहले खेत डूब गया”

रागिनी के पिता शिकंदर, बटाई पर खेती करते है । अब खेत के डूबने से उनकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई थी। मै रागनी के पिता से मिली उन्होंने बताया कि 3 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। सबसे बड़ा दुःख उन्हें इस बात का था कि उनकी 2 बड़ी बेटियाँ, जो मालनपुर के सरकारी स्कूल में 10 कक्षा में पढ़ने जाती थी , अब शायद पढ़ाई जारी नहीं रख पाएँगी। फसल डूब गयी, कर्जा और घर का खर्च ने उन्हें किनारे पर लाकर खड़ा कर दिया, जिसके चलते ट्यूशन के पैसे जुटा पाना अब मुश्किल हो गया था।

रागिनी का सपना डॉक्टर बनने का है , लेकिन अब उस सपने पर भी संकट के बादल मंडरा रहे है । वह जानती है कि अगर उसके पिता कर्ज़ नहीं चुका पाए, तो उनका ट्रैक्टर भी छिन जाएगा। इसके अलावा, सभी भाई बहनों की ट्यूशन की फीस का इंतज़ाम करना भी बहुत कठिन हो जाएगा। रागिनी की आँखों में एक अदम्य साहस और उम्मीद की झलक थी, लेकिन हालात ने उसकी मुस्कान को थोड़ा धूमिल कर दिया था।

यह कहानी सिर्फ़ रागिनी की नहीं थी, बल्कि पूरे गाँव में ऐसी कई कहानियाँ थी — जो दर्शाती थी की डैम के पानी से कई लोग प्रभावित हुए थे । गाँव के कई परिवारों ने अपनी फसलें और रोज़गार खो दिए है , और उनके बच्चे भी अब शिक्षा के सपने से दूर होते जा रहे है ।

रागिनी की आटे की गोलियाँ मछलियों के लिए थीं, लेकिन उन गोलियों में शायद उसके सपने भी थे, जो अब अनिश्चितता के पानी में तैर रहे थे।

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