हमारा सपना

उस भविष्य की एक झलक जिसके लिए हम काम कर रहे हैं।

हमारी कल्पना और हमारा सपना एक ऐसे विश्व की है जहाँ सहरिया समुदाय के लोग गर्व से खड़े हो - लाभार्थी के रूप में नहीं बल्कि नेत्रित्व करने वाले के रूप में, किसी चीज़ या वस्तु के रूप में नहीं बल्कि नागरिक के रूप में, पीड़ित के रूप में नहीं बल्कि विजेता के रूप में। जहाँ बच्चे जंगलों  में पनपती परंपरागत ज्ञान के उत्तराधिकारी बनें, जहाँ शोषण की जगह आर्थिक गरिमा का स्थान हो, जहाँ मरती हुई परंपरायें में वापस जान आ रही हो, जहाँ हर कोई सहरिया इज्जत से जी अपना जीवन जी पाये।

जब हम अपने आखों को बंद करके उस भविष्य की कल्पना करते है जिसके लिए हम काम कर रहे हैं, तो हम देखते हैं कि सहरिया समुदाय के लोग आत्मविश्वास, जोश और सम्मान के साथ खड़े हैं। एक ऐसा समुदाय, जिनका जंगल के साथ कभी सह अस्तित्व था, जंगलों में अधिकारों की मान्यता प्राप्त कर चुके है।

जल जंगल जमीन के साथ उनके पवित्र संबंध को फिर से स्थापित, पुर्नार्स्थापित, पोषित और उनके वजूद में शामिल कर लिया गया है। वन अधिकार उनके जीवन की वास्तविकता है – जहाँ समुदाय खुद निर्णय लेता है कि कौन से वृक्ष लगाये जाये, कौन से जानवरों को वापस लाया जाये और किन विकास कार्यों  में ज़मीन दी जाएगी होगी।  

सहरिया समुदायों का सामुदिक ढांचा वास्तव में कैसा दिखता है? 

प्रत्येक गांव में सहरिया सरपंच है, वह वास्तविक जन प्रतिनिधि है, कोई  कठपुतली नहीं है। जब किसी बच्चे के साथ भेदभाव होता है तो यह समुदाय एक साथ खड़ा होकर कहता है कि “बस!, अब नहीं”। उनका “संयुक्त वन प्रबंधन” मॉडल, राष्ट्रीय मॉडल बन गया है, इसमें फैसले वे लोग लेते हैं जो जमीनी हकीकत को सबसे करीब से जानते हैं। वे सम्मानजनक परिस्थितियों में काम-नौकरी  करने के लिए बातचीत करते हैं। 

उनकी गरिमा उनकी दिनचर्या में साफ़ दिखती है। सहरिया जमीन पर नहीं, अब कुर्सी पर बैठते हैं, अधिकारीयों की आंखों में आंखें मिलाकर बात करते हैं। समुदाय की औरतें, भ्रष्ट अधिकारीयों से निडर होकर बात करती हैं। नौजवान अपने नाम के साथ सहरिया शब्द को गर्व से जोड़ते हैं। आने वाली  पीढ़ियां बंधुआ मजदूर मुक्ति दिवस मनाती हैं, अंतिम घटना के 50 साल बाद वे वचन लेते हैं कि “फिर ऐसा कभी नहीं होगा” । वे अपनी अहमियत की गहरी भावना, स्वयं में विश्वास और  सहरिया समाज के मूल्यों पर गर्व करते हुए अपना परिचय देते हैं।

उनकी संस्कृति फिर से पनपने लगी है। बच्चे जंगलों में बाहरी लोगों की तरह नहीं बल्कि परंपरागत ज्ञान के वारिस के रूप में घूमते हैं। उनके झगड़े सुलझाने के तरीके (dispute resolution) कानून की पाठशाला, लॉ कॉलेज, में सिखाये जाते है। मुनाफे में उचित बंटवारे के साथ, उनका पर्यावरणीय और परंपरागत ज्ञान अंतर्राष्ट्रीय ज्ञान भंडार में जुड़ता है। प्रत्येक वर्ष आदिवासी साप्ताहिक उत्सव उनकी जीती जागती विरासत को दर्शाता है। 

यह सांस्कृतिक बदलाव आर्थिक बदलाव के साथ हाथो हाथ चलता है। तेंदू पत्ता कोआपरेटिव मुनाफा कमाता है। जड़ी बूटीयों का व्यवसाय अच्छा चलता है। जंगल में होमस्टे उन शहरी लोगो का स्वागत करता है जो उनके सादगीपूर्ण जीवन शैली से सीखने के इच्छुक हैं। सहरिया की न्यूतम मजदूरी, राष्ट्रीय स्तर पर घोषित न्यूनतम मजदूरी से 25% ज्यादा है क्योंकि, अंतत: उनके श्रम योगदान का उचित मूल्य भविषा में उन्हें मिलने लगा है। सहरिया युवा पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़कर आत्मविश्वास के साथ अलग-अलग व्यवसाय चुनते हैं और अपना रास्ता खुद तय करते हैं। 

जब हम दूरदृष्टि से भविष्य को देखते हैं तो हमे दिखता है की पॉवर-ताक़त में एक बहुत बड़ा बदलाव है। हम देखते हैं कि इस बदलाव का राजनितिक असर गांव से आगे बढ़कर राष्ट्रीय सोच तक पहुँच गया है। सहरिया डेवलपमेंट एडवाइजरी कौंसिल सहारिया समाज को आगे बढ़ाने के लिए  के लिए कानून बना रही है। सहरिया की भागीदारी से स्थानीय राजनितिक पार्टियों ने चुनावी माहौल बदल दिया है। सहरिया नेता संसद में ऐसे भाषण देते हैं, जो की वायरल  हो जाता है, उनकी आवाज पुरे देश में गूंजती है, इसमें उन लोगों की जिम्मेदारियों का वजन है जो यह जानते हैं कि वे कौन हैं और किसके लिए खड़े हैं। 

इस भविष्य में वे दूसरों के फैसलों को चुपचाप नहीं मानेगें बल्कि अपनी कहानी वे खुद लिखेंगें और अपना रास्ता ख़ुद बनायेंगे । इनको हाशिये पर लाने का सिलसिला सिर्फ धीमा ही नहीं हुआ है बल्कि इसकी जगह पर खुद से फैसला लेने की सोच अग्रसर हो रही है। जो शब्द कभी किस्मत के आधार पर कहे जाते थे कि “अभी तक कुछ हुआ ही नहीं”, वे अब उनकी ताकत के प्रमाण बन गए हैं और कह रहे हैं कि “हमने यह कर दिखाया”। 

एक दिन, वे सहजता से कहेंगे: "यहां से हम आगे बढ़ेंगें”। उस दिन हम समझ जाएँगे कि हमारी सोच और दूरदृष्टि अब असलियत बन गई है। और सहर की अब उन्हें ज़रूरत नहीं। 

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© जेनिथ सोसाइटी फॉर सोशियो-लीगल एम्पावरमेंट।